विद्या और ज्ञान की देवी सरस्वती के आहृवान का पर्व नजदीक है. आज हमारे समाने सबसे बड़ी चुनौती देश के पुनर्निर्माण की है. देश में व्याप्त जड़ता को तोड़ने की है. नये भारत के निर्माण में ज्ञान की भूमिका के सवाल पर केंद्रित विशेष आवरण-कथा.
‘वर दे, वीणावादिनी वर दे
प्रिय स्वतंत्र रव अमृत मंत्र नव भारत में भर दे..’
वसंत पंचमी के दिन जन्मे महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की ज्ञान की देवी सरस्वती का आह्वान करती कविता की ये पंक्तियां क्रांति का स्वप्न देखती हैं. ‘वर दे, वीणावादिनी वर दे’